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श्लोक 5.175.33  |
सर्वथा भागधेयानि स्वानि प्राप्नोति मानव:।
अनयस्यास्य तु मुखं भीष्म: शान्तनवो मम॥ ३३॥ |
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| अनुवाद |
| मनुष्य को सदैव वही मिलता है जो उसके लिए नियत होता है। मेरे साथ हुए इस अन्याय का मुख्य कारण शान्तनु नन्दन भीष्म हैं।' 33. |
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| ‘A man always gets what is destined for him. The main reason for this injustice done to me is Shantanu Nandan Bhishma. 33. |
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