श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 175: अम्बाका शाल्वके यहाँ जाना और उससे परित्यक्त होकर तापसोंके आश्रममें आना, वहाँ शैखावत्य और अम्बाका संवाद  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  5.175.33 
सर्वथा भागधेयानि स्वानि प्राप्नोति मानव:।
अनयस्यास्य तु मुखं भीष्म: शान्तनवो मम॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
मनुष्य को सदैव वही मिलता है जो उसके लिए नियत होता है। मेरे साथ हुए इस अन्याय का मुख्य कारण शान्तनु नन्दन भीष्म हैं।' 33.
 
‘A man always gets what is destined for him. The main reason for this injustice done to me is Shantanu Nandan Bhishma. 33.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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