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mahabharat 5.175.22: हे राजन! यदि मैंने जो कहा है वह सत्य है, तो आपके द्वारा त्याग दिए जाने के बाद मैं जहाँ भी जाऊँगा, वहाँ मुझे सहारा देने वाले पुण्यात्मा पुरुष अवश्य मिलेंगे।'   |   mahabharat अध्याय 5.175: अम्बाका शाल्वके यहाँ जाना और उससे परित्यक्त होकर तापसोंके आश्रममें आना, वहाँ शैखावत्य और अम्बाका संवाद   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 175: अम्बाका शाल्वके यहाँ जाना और उससे परित्यक्त होकर तापसोंके आश्रममें आना, वहाँ शैखावत्य और अम्बाका संवाद  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  5.175.22 
त्वया त्यक्ता गमिष्यामि यत्र तत्र विशाम्पते।
तत्र मे गतय: सन्तु सन्त: सत्यं यथा ध्रुवम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! यदि मैंने जो कहा है वह सत्य है, तो आपके द्वारा त्याग दिए जाने के बाद मैं जहाँ भी जाऊँगा, वहाँ मुझे सहारा देने वाले पुण्यात्मा पुरुष अवश्य मिलेंगे।'
 
O King! If what I have said is certainly true, then after being deserted by you, wherever I go, there should be virtuous men to support me.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)