श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 175: अम्बाका शाल्वके यहाँ जाना और उससे परित्यक्त होकर तापसोंके आश्रममें आना, वहाँ शैखावत्य और अम्बाका संवाद  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  5.175.21 
तत: सा मन्युनाऽऽविष्टा ज्येष्ठा काशिपते: सुता।
अब्रवीत् साश्रुनयना बाष्पविप्लुतया गिरा॥ २१॥
 
 
अनुवाद
तब काशीराज की ज्येष्ठ पुत्री अम्बा क्रोध और शोक से भरी हुई, नेत्रों से आँसू बहाती हुई, अश्रुपूर्ण वाणी में बोली-॥21॥
 
Then Amba, the eldest daughter of the King of Kashi, filled with anger and sorrow, shedding tears from her eyes, spoke in tearful voice -॥ 21॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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