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श्लोक 5.175.2-4  |
अनुज्ञाता ययौ सा तु कन्या शाल्वपते: पुरम्॥ २॥
वृद्धैर्द्विजातिभिर्गुप्ता धात्र्या चानुगता तदा।
अतीत्य च तमध्वानमासाद्य नृपतिं तथा॥ ३॥
सा तमासाद्य राजानं शाल्वं वचनमब्रवीत्।
आगताहं महाबाहो त्वामुद्दिश्य महामते॥ ४॥ |
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| अनुवाद |
| आज्ञा पाकर राजकुमारी अम्बा वृद्ध ब्राह्मणों के संरक्षण में शाल्वराज के नगर को चली गई। उसकी धाय भी उसके साथ थी। उस मार्ग को पार करके वह राजा के यहाँ पहुँची और शाल्वराज से मिलकर इस प्रकार बोली - 'महाबाहो! महामते! मैं आपके ही पास आई हूँ।॥ 2-4॥ |
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| After getting the permission, Princess Amba went to the city of Shalvaraj under the protection of old Brahmins. Her nurse was also with her. Crossing that path, she reached the king's place and after meeting Shalvaraj, she said thus - 'Mahabaho! Mahamate! I have come to you only.॥ 2-4॥ |
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