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mahabharat 5.175.18: हे महाकौशल्यवान राजा! मैंने आज से पहले कभी किसी अन्य पुरुष को अपना पति नहीं माना। मैं आपकी कृपा चाहती हूँ। कृपया मुझ कुमारी कन्या को, जो आपकी सेवा में प्रस्तुत हुई है, अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार करें।॥18॥   |   mahabharat अध्याय 5.175: अम्बाका शाल्वके यहाँ जाना और उससे परित्यक्त होकर तापसोंके आश्रममें आना, वहाँ शैखावत्य और अम्बाका संवाद   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 175: अम्बाका शाल्वके यहाँ जाना और उससे परित्यक्त होकर तापसोंके आश्रममें आना, वहाँ शैखावत्य और अम्बाका संवाद  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  5.175.18 
भजस्व मां विशालाक्ष स्वयं कन्यामुपस्थिताम्।
अनन्यपूर्वां राजेन्द्र त्वत्प्रसादाभिकाङ्क्षिणीम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
हे महाकौशल्यवान राजा! मैंने आज से पहले कभी किसी अन्य पुरुष को अपना पति नहीं माना। मैं आपकी कृपा चाहती हूँ। कृपया मुझ कुमारी कन्या को, जो आपकी सेवा में प्रस्तुत हुई है, अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार करें।॥18॥
 
O great-eyed king! I have never considered any other man as my husband before today. I desire your kindness. Please accept me, this virgin girl who has presented myself in your service, as your wife.'॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)