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श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 17: अगस्त्यजीका इन्द्रसे नहुषके पतनका वृत्तान्त बताना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  5.17.12 
अगस्त्य उवाच
ततो विवदमान: स मुनिभि: सह वासव।
अथ मामस्पृशन्मूर्ध्नि पादेनाधर्मपीडित:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
अगस्त्य कहते हैं - इन्द्र! तब नहुष ऋषियों से विवाद करने लगा और अपने दुष्कर्मों से संतप्त होकर उस पापी ने मेरे सिर पर पैर से प्रहार किया।
 
Agastya says - Indra! Then Nahush started arguing with the sages and being tormented by his wrongdoings, that sinner struck my head with his foot.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)