Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.169.27-28: वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! भीष्मजी के ये वचन सुनकर मानो पाण्डवों का पूर्वकाल में पराक्रम और पराक्रम देखकर राजाओं की विशाल भुजाएँ, जो सुवर्ण के बाजूबंदों से विभूषित थीं और चन्दन से लिपी हुई थीं, तथा उनके मन भी व्याकुल और शांत हो गए ॥27-28॥ | mahabharat अध्याय 5.169: पाण्डवपक्षके रथी आदिका एवं उनकी महिमाका वर्णन । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! भीष्मजी के ये वचन सुनकर मानो पाण्डवों का पूर्वकाल में पराक्रम और पराक्रम देखकर राजाओं की विशाल भुजाएँ, जो सुवर्ण के बाजूबंदों से विभूषित थीं और चन्दन से लिपी हुई थीं, तथा उनके मन भी व्याकुल और शांत हो गए ॥27-28॥
Vaishmpayana says: Janamejaya! On hearing these words of Bhishma, as if having seen the might and valour of the Pandavas in the past, the kings' huge arms, adorned with golden armlets and smeared with sandalwood, and their minds too became agitated and relaxed. ॥27-28॥
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि रथातिरथसंख्यानपर्वणि पाण्डवरथातिरथसंख्यायां एकोनसप्तत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १६९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत रथातिरथसंख्यानपर्वमें पाण्डवपक्षके रथियों और अतिरथियोंका संख्याविषयक एक सौ उनहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १६९॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥