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mahabharat 5.168.9: वह प्रत्येक युद्ध में बड़ा अभिमान करता है; किन्तु वहाँ से सदैव भागता हुआ दिखाई देता है। कर्ण दयालु और लापरवाह है। अतः मेरी दृष्टि में भी वह अर्धयोद्धा है॥9॥   |   mahabharat अध्याय 5.168: कौरवपक्षके रथियों और अतिरथियोंका वर्णन, कर्ण और भीष्मका रोषपूर्वक संवाद तथा दुर्योधनद्वारा उसका निवारण   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 168: कौरवपक्षके रथियों और अतिरथियोंका वर्णन, कर्ण और भीष्मका रोषपूर्वक संवाद तथा दुर्योधनद्वारा उसका निवारण  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  5.168.9 
रणे रणेऽभिमानी च विमुखश्चापि दृश्यते।
घृणी कर्ण: प्रमादी च तेन मेऽर्धरथो मत:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
वह प्रत्येक युद्ध में बड़ा अभिमान करता है; किन्तु वहाँ से सदैव भागता हुआ दिखाई देता है। कर्ण दयालु और लापरवाह है। अतः मेरी दृष्टि में भी वह अर्धयोद्धा है॥9॥
 
He shows a lot of pride in every battle; but is always seen running away from there. Karna is kind and careless. Hence in my opinion also he is a half-warrior'॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)