Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 5.168.8: यह सुनकर शस्त्रधारियों में श्रेष्ठ द्रोणाचार्य ने भी कहा, 'आप जो कुछ कहते हैं, वह सर्वथा सत्य है। आपका मत कभी मिथ्या नहीं होता।'   |   mahabharat अध्याय 5.168: कौरवपक्षके रथियों और अतिरथियोंका वर्णन, कर्ण और भीष्मका रोषपूर्वक संवाद तथा दुर्योधनद्वारा उसका निवारण   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 168: कौरवपक्षके रथियों और अतिरथियोंका वर्णन, कर्ण और भीष्मका रोषपूर्वक संवाद तथा दुर्योधनद्वारा उसका निवारण  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  5.168.8 
ततोऽब्रवीत् पुनर्द्रोण: सर्वशस्त्रभृतां वर:।
एवमेतद् यथाऽऽत्थ त्वं न मिथ्यास्ति कदाचन॥ ८॥
 
 
अनुवाद
यह सुनकर शस्त्रधारियों में श्रेष्ठ द्रोणाचार्य ने भी कहा, 'आप जो कुछ कहते हैं, वह सर्वथा सत्य है। आपका मत कभी मिथ्या नहीं होता।'
 
Hearing this, even Dronacharya, the best amongst all weapon wielders, said, 'Whatever you say is absolutely correct. Your opinion is never false.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)