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mahabharat 5.168.38: हे दुर्मते! तुम जिस अर्जुन से सदैव युद्ध करते हो, उसके साथ रणभूमि में युद्ध करो। मैं देखूँगा कि तुम इस युद्ध से कैसे बचकर निकलोगे।   |   mahabharat अध्याय 5.168: कौरवपक्षके रथियों और अतिरथियोंका वर्णन, कर्ण और भीष्मका रोषपूर्वक संवाद तथा दुर्योधनद्वारा उसका निवारण   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 168: कौरवपक्षके रथियों और अतिरथियोंका वर्णन, कर्ण और भीष्मका रोषपूर्वक संवाद तथा दुर्योधनद्वारा उसका निवारण  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  5.168.38 
युद्धॺस्व समरे पार्थं येन विस्पर्धसे सह।
द्रक्ष्यामि त्वां विनिर्मुक्तमस्माद् युद्धात् सुदुर्मते॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
हे दुर्मते! तुम जिस अर्जुन से सदैव युद्ध करते हो, उसके साथ रणभूमि में युद्ध करो। मैं देखूँगा कि तुम इस युद्ध से कैसे बचकर निकलोगे।
 
O Durmate! Fight in the battlefield with Arjuna with whom you always compete. I will see how you escape from this battle.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)