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mahabharat 5.168.37: आप वैराग्य के साक्षात् स्वरूप हैं। आपका आश्रय पाकर कुरुकुल के विनाश के लिए महान अन्याय किया गया है। अब आप रक्षा की व्यवस्था कीजिए और अपना पुरुषत्व प्रकट कीजिए। 37॥   |   mahabharat अध्याय 5.168: कौरवपक्षके रथियों और अतिरथियोंका वर्णन, कर्ण और भीष्मका रोषपूर्वक संवाद तथा दुर्योधनद्वारा उसका निवारण   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 168: कौरवपक्षके रथियों और अतिरथियोंका वर्णन, कर्ण और भीष्मका रोषपूर्वक संवाद तथा दुर्योधनद्वारा उसका निवारण  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  5.168.37 
त्वां प्राप्य वैरपुरुषं कुरूणामनयो महान्।
उपस्थितो विनाशाय यतस्व पुरुषो भव॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
आप वैराग्य के साक्षात् स्वरूप हैं। आपका आश्रय पाकर कुरुकुल के विनाश के लिए महान अन्याय किया गया है। अब आप रक्षा की व्यवस्था कीजिए और अपना पुरुषत्व प्रकट कीजिए। 37॥
 
You are the embodiment of Vairaka. After getting your support, a great injustice has been done for the destruction of Kurukula. Now you arrange for protection and show your masculinity. 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)