Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.168.33: जमदग्निपुत्र परशुरामजी ने मुझ पर अनेक बड़े-बड़े अस्त्रों का प्रयोग किया, परन्तु वे भी मुझे कुछ पीड़ा नहीं पहुँचा सके। फिर तुम मेरा क्या कर सकते हो?॥ 33॥ | mahabharat अध्याय 5.168: कौरवपक्षके रथियों और अतिरथियोंका वर्णन, कर्ण और भीष्मका रोषपूर्वक संवाद तथा दुर्योधनद्वारा उसका निवारण । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जामदग्न्येन रामेण महास्त्राणि विमुञ्चता।
न मे व्यथा कृता काचित् त्वं तु मे किं करिष्यसि॥ ३३॥
अनुवाद
जमदग्निपुत्र परशुरामजी ने मुझ पर अनेक बड़े-बड़े अस्त्रों का प्रयोग किया, परन्तु वे भी मुझे कुछ पीड़ा नहीं पहुँचा सके। फिर तुम मेरा क्या कर सकते हो?॥ 33॥
Jamadagni's son Parashurama used many big weapons on me, but even they could not cause me any pain. Then what can you do to me?॥ 33॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥