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mahabharat 5.168.27: नृपश्रेष्ठ! इस युद्ध में मैं अकेले ही पाण्डव सेना का संहार कर दूँगा; किन्तु सारा यश भीष्म को मिलेगा।   |   mahabharat अध्याय 5.168: कौरवपक्षके रथियों और अतिरथियोंका वर्णन, कर्ण और भीष्मका रोषपूर्वक संवाद तथा दुर्योधनद्वारा उसका निवारण   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 168: कौरवपक्षके रथियों और अतिरथियोंका वर्णन, कर्ण और भीष्मका रोषपूर्वक संवाद तथा दुर्योधनद्वारा उसका निवारण  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  5.168.27 
अहमेको हनिष्यामि पाण्डवानामनीकिनीम्।
सुयुद्धे राजशार्दूल यशो भीष्मं गमिष्यति॥ २७॥
 
 
अनुवाद
नृपश्रेष्ठ! इस युद्ध में मैं अकेले ही पाण्डव सेना का संहार कर दूँगा; किन्तु सारा यश भीष्म को मिलेगा।
 
Nrupashrestha! I will single-handedly destroy the Pandava army in this war; But all the fame will go to Bhishma.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)