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mahabharat 5.168.22: रथियों में कहाँ समझदारी और कहाँ अज्ञानी भीष्म? मैं ही पाण्डव सेना को आगे बढ़ने से रोकूँगा॥ 22॥   |   mahabharat अध्याय 5.168: कौरवपक्षके रथियों और अतिरथियोंका वर्णन, कर्ण और भीष्मका रोषपूर्वक संवाद तथा दुर्योधनद्वारा उसका निवारण   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 168: कौरवपक्षके रथियों और अतिरथियोंका वर्णन, कर्ण और भीष्मका रोषपूर्वक संवाद तथा दुर्योधनद्वारा उसका निवारण  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  5.168.22 
रथानां क्व च विज्ञानं क्व च भीष्मोऽल्पचेतन:।
अहमावारयिष्यामि पाण्डवानामनीकिनीम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
रथियों में कहाँ समझदारी और कहाँ अज्ञानी भीष्म? मैं ही पाण्डव सेना को आगे बढ़ने से रोकूँगा॥ 22॥
 
Where is understanding among the charioteers and where is the ignorant Bhishma? I alone will stop the Pandava army from advancing.॥ 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)