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mahabharat 5.168.19: महाबाहु दुर्योधन! तुम्हें अच्छी तरह सोच लेना चाहिए। यह भीष्म दुर्भावना से कलंकित है और तुम्हारी बुराई कर रहा है। तुम्हें इसे अभी छोड़ देना चाहिए॥ 19॥   |   mahabharat अध्याय 5.168: कौरवपक्षके रथियों और अतिरथियोंका वर्णन, कर्ण और भीष्मका रोषपूर्वक संवाद तथा दुर्योधनद्वारा उसका निवारण   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 168: कौरवपक्षके रथियों और अतिरथियोंका वर्णन, कर्ण और भीष्मका रोषपूर्वक संवाद तथा दुर्योधनद्वारा उसका निवारण  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  5.168.19 
दुर्योधन महाबाहो साधु सम्यगवेक्ष्यताम्।
त्यज्यतां दुष्टभावोऽयं भीष्म: किल्बिषकृत् तव॥ १९॥
 
 
अनुवाद
महाबाहु दुर्योधन! तुम्हें अच्छी तरह सोच लेना चाहिए। यह भीष्म दुर्भावना से कलंकित है और तुम्हारी बुराई कर रहा है। तुम्हें इसे अभी छोड़ देना चाहिए॥ 19॥
 
Mahabahu Duryodhan! You should think carefully. This Bhishma is tainted with ill intentions and is speaking ill of you. You should leave him right now.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)