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mahabharat 5.168.18: तुम राग-द्वेष से भरे हुए हो; इसलिए मोहवश तुम रथियों और अतिथियों को मनमाने ढंग से बांट रहे हो।   |   mahabharat अध्याय 5.168: कौरवपक्षके रथियों और अतिरथियोंका वर्णन, कर्ण और भीष्मका रोषपूर्वक संवाद तथा दुर्योधनद्वारा उसका निवारण   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 168: कौरवपक्षके रथियों और अतिरथियोंका वर्णन, कर्ण और भीष्मका रोषपूर्वक संवाद तथा दुर्योधनद्वारा उसका निवारण  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  5.168.18 
यथेच्छकं स्वयं ब्रूया रथानतिरथांस्तथा।
कामद्वेषसमायुक्तो मोहात् प्रकुरुते भवान्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
तुम राग-द्वेष से भरे हुए हो; इसलिए मोहवश तुम रथियों और अतिथियों को मनमाने ढंग से बांट रहे हो।
 
‘You are filled with love and hatred; therefore, due to your attachment, you are dividing the charioteers and guests arbitrarily.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)