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न हायनैर्न पलितैर्न वित्तैर्न च बन्धुभि:।
महारथत्वं संख्यातुं शक्यं क्षत्रस्य कौरव॥ १६॥
अनुवाद
कौरवों! केवल वृद्ध हो जाने, केश बढ़ जाने, बहुत धन इकट्ठा कर लेने तथा बहुत से भाई-बन्धु हो जाने से ही क्षत्रिय महारथी नहीं माना जा सकता॥16॥
Kauravas! A Kshatriya cannot be considered a Maharathi merely by growing old, having matured hair, accumulating a lot of wealth and having many brothers and relatives.॥ 16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥