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mahabharat 5.168.14-15: तुम कौरवों को सदैव हानि पहुँचाते हो; परन्तु राजा दुर्योधन यह बात नहीं समझता। मेरे गुणों से द्वेष रखने के कारण तुम जिस प्रकार राजाओं को मुझसे विमुख करने का प्रयत्न कर रहे हो, वह तुम्हारे अतिरिक्त और कौन कर सकता है? इस समय युद्ध का अवसर आया है और उदार चरित्र वाले समान पद वाले राजा एकत्र हुए हैं; ऐसे अवसर पर कौन अपने पक्ष के योद्धाओं में फूट (कलह) उत्पन्न करके उनके तेज और उत्साह को नष्ट करेगा?॥ 14-15॥   |   mahabharat अध्याय 5.168: कौरवपक्षके रथियों और अतिरथियोंका वर्णन, कर्ण और भीष्मका रोषपूर्वक संवाद तथा दुर्योधनद्वारा उसका निवारण   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 168: कौरवपक्षके रथियों और अतिरथियोंका वर्णन, कर्ण और भीष्मका रोषपूर्वक संवाद तथा दुर्योधनद्वारा उसका निवारण  »  श्लोक 14-15
 
 
श्लोक  5.168.14-15 
कुरूणामहितो नित्यं न च राजावबुध्यते।
को हि नाम समानेषु राजसूदारकर्मसु॥ १४॥
तेजोवधमिमं कुर्याद् विभेदयिषुराहवे।
यथा त्वं गुणविद्वेषादपरागं चिकीर्षसि॥ १५॥
 
 
अनुवाद
तुम कौरवों को सदैव हानि पहुँचाते हो; परन्तु राजा दुर्योधन यह बात नहीं समझता। मेरे गुणों से द्वेष रखने के कारण तुम जिस प्रकार राजाओं को मुझसे विमुख करने का प्रयत्न कर रहे हो, वह तुम्हारे अतिरिक्त और कौन कर सकता है? इस समय युद्ध का अवसर आया है और उदार चरित्र वाले समान पद वाले राजा एकत्र हुए हैं; ऐसे अवसर पर कौन अपने पक्ष के योद्धाओं में फूट (कलह) उत्पन्न करके उनके तेज और उत्साह को नष्ट करेगा?॥ 14-15॥
 
‘You always harm the Kauravas; but King Duryodhana does not understand this. The way you are trying to make the kings turn away from me because of your hatred for my qualities, who else can do that except you? At this time the occasion of war has come and the kings of equal rank with magnanimous character have gathered; on such an occasion, who will destroy the brilliance and enthusiasm of the warriors of his own side by wishing to create differences (dissension) among them?॥ 14-15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)