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mahabharat 5.168.13: तुम मेरे विषय में जो मत व्यक्त कर रहे हो, वह निःसंदेह सम्पूर्ण जगत् को ऐसा ही प्रतीत होगा; क्योंकि सब लोग जानते हैं कि गंगापुत्र भीष्म झूठ नहीं बोलते॥13॥   |   mahabharat अध्याय 5.168: कौरवपक्षके रथियों और अतिरथियोंका वर्णन, कर्ण और भीष्मका रोषपूर्वक संवाद तथा दुर्योधनद्वारा उसका निवारण   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 168: कौरवपक्षके रथियों और अतिरथियोंका वर्णन, कर्ण और भीष्मका रोषपूर्वक संवाद तथा दुर्योधनद्वारा उसका निवारण  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  5.168.13 
भवानर्धरथो मह्यं मतो वै नात्र संशय:।
सर्वस्य जगतश्चैव गाङ्गेयो न मृषा वदेत्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
तुम मेरे विषय में जो मत व्यक्त कर रहे हो, वह निःसंदेह सम्पूर्ण जगत् को ऐसा ही प्रतीत होगा; क्योंकि सब लोग जानते हैं कि गंगापुत्र भीष्म झूठ नहीं बोलते॥13॥
 
The opinion you are expressing about me being a half-chariot will undoubtedly appear to the entire world as such; because everybody knows that Ganga's son Bhishma does not lie.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)