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श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 168: कौरवपक्षके रथियों और अतिरथियोंका वर्णन, कर्ण और भीष्मका रोषपूर्वक संवाद तथा दुर्योधनद्वारा उसका निवारण  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  5.168.11 
पितामह यथेष्टं मां वाक्शरैरुपकृन्तसि।
अनागसं सदा द्वेषादेवमेव पदे पदे॥ ११॥
 
 
अनुवाद
दादाजी! यद्यपि मैंने आपका कोई अपराध नहीं किया है, फिर भी आप मुझसे द्वेष रखने के कारण अपनी इच्छानुसार पग-पग पर मुझे अपने वचनों से कष्ट पहुँचाते रहते हैं।
 
Grandfather! Although I have not done any crime to you, still because of your hatred towards me you keep hurting me with your words at every step as per your wish.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)