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mahabharat 5.168.10: यह सुनकर राधानन्दन कर्ण क्रोधपूर्वक भीष्म को कोड़े के समान शब्दों से घूरने लगा और उनसे बोला-॥10॥   |   mahabharat अध्याय 5.168: कौरवपक्षके रथियों और अतिरथियोंका वर्णन, कर्ण और भीष्मका रोषपूर्वक संवाद तथा दुर्योधनद्वारा उसका निवारण   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 168: कौरवपक्षके रथियों और अतिरथियोंका वर्णन, कर्ण और भीष्मका रोषपूर्वक संवाद तथा दुर्योधनद्वारा उसका निवारण  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  5.168.10 
एतच्छ्रुत्वा तु राधेय: क्रोधादुत्फाल्य लोचने।
उवाच भीष्मं राधेयस्तुदन् वाग्भि: प्रतोदवत्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
यह सुनकर राधानन्दन कर्ण क्रोधपूर्वक भीष्म को कोड़े के समान शब्दों से घूरने लगा और उनसे बोला-॥10॥
 
On hearing this, Radhanandan Karna started glaring angrily at Bhishma with his words like whip and said to him -॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)