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श्लोक 5.167.38  |
एष योत्स्यति संग्रामे गजस्कन्धविशारद:।
ऐरावतगतो राजा देवानामिव वासव:॥ ३८॥ |
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| अनुवाद |
| राजा भगदत्त हाथी की पीठ पर बैठकर युद्ध करने में अत्यन्त कुशल हैं। वे ऐरावत पर बैठकर देवताओं के राजा इन्द्र के समान युद्ध में तुम्हारे शत्रुओं से युद्ध करेंगे। 38. |
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| King Bhagadatta is very skilled in fighting while sitting on the back of an elephant. He will fight your enemies in the battle like the king of gods Indra while sitting on Airavat. 38. |
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इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि रथातिरथसंख्यानपर्वणि सप्तषष्ट्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १६७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत रथातिरथसंख्यानपर्वमें एक सौ सरसठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १६७॥
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