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mahabharat 5.167.16: महान धनुर्धर द्रोणाचार्य का उज्ज्वल आचार्यभाव अर्जुन के गुणों से जीत लिया गया है। उसका स्मरण करके वे बिना किसी प्रयास के महान कर्म करने वाले कुन्तीपुत्र अर्जुन को कभी नहीं मारेंगे। 16॥   |   mahabharat अध्याय 5.167: कौरवपक्षके रथी, महारथी और अतिरथियोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 167: कौरवपक्षके रथी, महारथी और अतिरथियोंका वर्णन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  5.167.16 
नैष जातु महेष्वास: पार्थमक्लिष्टकारिणम्।
हन्यादाचार्यकं दीप्तं संस्मृत्य गुणनिर्जितम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
महान धनुर्धर द्रोणाचार्य का उज्ज्वल आचार्यभाव अर्जुन के गुणों से जीत लिया गया है। उसका स्मरण करके वे बिना किसी प्रयास के महान कर्म करने वाले कुन्तीपुत्र अर्जुन को कभी नहीं मारेंगे। 16॥
 
The great archer Dronacharya's bright Acharyabhava has been conquered by the qualities of Arjuna. Remembering him, he will never kill Arjuna, the son of Kunti, who does great deeds without any effort. 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)