श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 167: कौरवपक्षके रथी, महारथी और अतिरथियोंका वर्णन  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  5.167.13 
अस्त्रवेगानिलोद्‍धूत: सेनाकक्षेन्धनोत्थित:।
पाण्डुपुत्रस्य सैन्यानि प्रधक्ष्यति रणे धृत:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
युद्धभूमि में अविचल खड़े हुए द्रोणाचार्य अग्नि के समान हैं। वे शस्त्ररूपी वायु से प्रज्वलित होंगे और सेनारूपी घास और ईंधन पाकर प्रज्वलित हो उठेंगे। इस प्रकार वे पाण्डुपुत्र युधिष्ठिर की सेनाओं को जलाकर भस्म कर देंगे॥13॥
 
Dronacharya standing firm on the battlefield is like fire. He will be aroused by the wind in the form of weapons and will become aflame by getting the grass and fuel in the form of the army. In this way, he will burn to ashes the armies of Yudhishthira, son of Pandu.॥13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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