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mahabharat 5.165.13: फिर जब आप जैसे प्रचण्ड योद्धा हमारे सेनापति के रूप में स्थित हैं और युद्ध का स्वागत करने वाले सिंह-पुरुष द्रोणाचार्य जैसे योद्धा मेरे लिए रणभूमि में उपस्थित हैं, तब मुझे कैसा भय? ॥13॥   |   mahabharat अध्याय 5.165: दुर्योधनके पूछनेपर भीष्मका कौरवपक्षके रथियों और अतिरथियोंका परिचय देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 165: दुर्योधनके पूछनेपर भीष्मका कौरवपक्षके रथियों और अतिरथियोंका परिचय देना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  5.165.13 
किं पुनस्त्वयि दुर्धर्षे सैनापत्ये व्यवस्थिते।
द्रोणे च पुरुषव्याघ्रे स्थिते युद्धाभिनन्दिनि॥ १३॥
 
 
अनुवाद
फिर जब आप जैसे प्रचण्ड योद्धा हमारे सेनापति के रूप में स्थित हैं और युद्ध का स्वागत करने वाले सिंह-पुरुष द्रोणाचार्य जैसे योद्धा मेरे लिए रणभूमि में उपस्थित हैं, तब मुझे कैसा भय? ॥13॥
 
Then, when a fierce warrior like you is stationed as our commander-in-chief and a warrior like the lion-man Dronacharya, who welcomes the war, is present on the battlefield for me, then how can I be afraid? ॥13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)