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mahabharat 5.165.10: मैं देवताओं, गन्धर्वों और मनुष्यों की सभी योनियों को जानता हूँ। मैं उनका प्रयोग करके पाण्डवों को मोहित करूँगा। अतः तुम्हारी मानसिक चिन्ता दूर हो जाए॥ 10॥   |   mahabharat अध्याय 5.165: दुर्योधनके पूछनेपर भीष्मका कौरवपक्षके रथियों और अतिरथियोंका परिचय देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 165: दुर्योधनके पूछनेपर भीष्मका कौरवपक्षके रथियों और अतिरथियोंका परिचय देना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  5.165.10 
व्यूहानां च समारम्भान् दैवगान्धर्वमानुषान्।
तैरहं मोहयिष्यामि पाण्डवान् व्येतु ते ज्वर:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
मैं देवताओं, गन्धर्वों और मनुष्यों की सभी योनियों को जानता हूँ। मैं उनका प्रयोग करके पाण्डवों को मोहित करूँगा। अतः तुम्हारी मानसिक चिन्ता दूर हो जाए॥ 10॥
 
I know the formations of the gods, Gandharvas and humans. I will use them to enchant the Pandavas. Therefore, your mental anxiety should go away.॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)