vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 5: उद्योग पर्व
»
अध्याय 163: पाँचों पाण्डवों, विराट, द्रुपद, शिखण्डी और धृष्टद्युम्नका संदेश लेकर उलूकका लौटना और उलूककी बात सुनकर दुर्योधनका सेनाको युद्धके लिये तैयार होनेका आदेश देना
»
श्लोक 47
श्लोक
5.163.47
अवश्यं च मया कार्यं पूर्वेषां चरितं महत्।
कर्ता चाहं तथा कर्म यथा नान्य: करिष्यति॥ ४७॥
अनुवाद
मुझे अपने पूर्वजों के महान चरित्र का अनुकरण करना होगा। इसलिए मैं युद्ध में ऐसा पराक्रम दिखाऊँगा, जैसा कोई और नहीं दिखा सकेगा।॥47॥
I must emulate the great character of my ancestors. Therefore, I will display such valour in the war, which no one else will do.'॥ 47॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×