सहदेवोऽपि नृपते इदमाह वचोऽर्थवत्।
सुयोधन मतिर्या ते वृथैषा ते भविष्यति॥ ३९॥
शोचिष्यसे महाराज सपुत्रज्ञातिबान्धव:।
इमं च क्लेशमस्माकं हृष्टो यत् त्वं विकत्थसे॥ ४०॥
अनुवाद
राजन! तत्पश्चात् सहदेव ने भी ये अर्थपूर्ण वचन कहे- 'महाराज दुर्योधन! आज तुम्हारी जो भी बुद्धि है, वह व्यर्थ हो जाएगी। इस समय हमारा यह महान क्लेश, जिसका तुम हर्षपूर्वक वर्णन कर रहे हो, उसके फलस्वरूप तुम अपने पुत्र, कुटुम्बियों तथा बन्धु-बान्धवों सहित शोक में डूब जाओगे।' 39-40॥
Rajan! Thereafter Sahadev also said these meaningful words – 'Maharaj Duryodhan! Whatever intelligence you have today will go waste. At this time, this great tribulation of ours which you are narrating with joy, will result in you drowning in grief along with your son, family members and relatives. 39-40॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥