श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 163: पाँचों पाण्डवों, विराट, द्रुपद, शिखण्डी और धृष्टद्युम्नका संदेश लेकर उलूकका लौटना और उलूककी बात सुनकर दुर्योधनका सेनाको युद्धके लिये तैयार होनेका आदेश देना  »  श्लोक 33-34
 
 
श्लोक  5.163.33-34 
दु:शासनस्य रुधिरं हत्वा पास्याम्यहं मृधे॥ ३३॥
सक्थिनी तव भङ्‍‍क्‍त्‍वैव हत्वा हि तव सोदरान्।
सर्वेषां धार्तराष्ट्राणामहं मृत्यु: सुयोधन॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
मैं युद्ध में दु:शासन को मारकर उसका रक्त पी जाऊँगा और तुम्हारे सभी भाइयों को मारकर तुम्हारी जाँघें तोड़ दूँगा। सुयोधन! मैं धृतराष्ट्र के सभी पुत्रों का काल हूँ।
 
I will kill Dushasan in the war and drink his blood and I will kill all your brothers and break your thighs. Suyodhana! I am the death of all the sons of Dhritarashtra.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)