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mahabharat 5.163.17-19: दुर्योधन! अभिमान, अहंकार, क्रोध, कटुवचन, क्रूरता, अहंकार, आत्मप्रशंसा, क्रूरता, कठोरता, धर्मद्वेष, अधर्म, अतिवाद, वृद्ध पुरुषों का अपमान और तिरछी दृष्टि से देखना तथा तेरे सब अन्याय और अत्याचारों का भयंकर परिणाम तू शीघ्र ही देखेगा। 17-19॥   |   mahabharat अध्याय 5.163: पाँचों पाण्डवों, विराट, द्रुपद, शिखण्डी और धृष्टद्युम्नका संदेश लेकर उलूकका लौटना और उलूककी बात सुनकर दुर्योधनका सेनाको युद्धके लिये तैयार होनेका आदेश देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 163: पाँचों पाण्डवों, विराट, द्रुपद, शिखण्डी और धृष्टद्युम्नका संदेश लेकर उलूकका लौटना और उलूककी बात सुनकर दुर्योधनका सेनाको युद्धके लिये तैयार होनेका आदेश देना  »  श्लोक 17-19
 
 
श्लोक  5.163.17-19 
अभिमानस्य दर्पस्य क्रोधपारुष्ययोस्तथा।
नैष्ठुर्यस्यावलेपस्य आत्मसम्भावनस्य च॥ १७॥
नृशंसतायास्तैक्ष्ण्यस्य धर्मविद्वेषणस्य च।
अधर्मस्यातिवादस्य वृद्धातिक्रमणस्य च॥ १८॥
दर्शनस्य च वक्रस्य कृत्स्नस्यापनयस्य च।
द्रक्ष्यसि त्वं फलं तीव्रमचिरेण सुयोधन॥ १९॥
 
 
अनुवाद
दुर्योधन! अभिमान, अहंकार, क्रोध, कटुवचन, क्रूरता, अहंकार, आत्मप्रशंसा, क्रूरता, कठोरता, धर्मद्वेष, अधर्म, अतिवाद, वृद्ध पुरुषों का अपमान और तिरछी दृष्टि से देखना तथा तेरे सब अन्याय और अत्याचारों का भयंकर परिणाम तू शीघ्र ही देखेगा। 17-19॥
 
Duryodhana! You will soon see the dire consequences of pride, arrogance, anger, harsh words, cruelty, arrogance, self-praise, cruelty, harshness, religious hatred, unrighteousness, extremism, insulting older men and looking with slant eyes and all your injustices and atrocities. 17-19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)