श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 163: पाँचों पाण्डवों, विराट, द्रुपद, शिखण्डी और धृष्टद्युम्नका संदेश लेकर उलूकका लौटना और उलूककी बात सुनकर दुर्योधनका सेनाको युद्धके लिये तैयार होनेका आदेश देना  »  श्लोक 15-16
 
 
श्लोक  5.163.15-16 
यदुक्तश्च सभामध्ये पुुरुषो ह्रस्वदर्शन:।
क्रुद्धेन भीमसेनेन भ्राता दु:शासनस्तव॥ १५॥
अधर्मज्ञो नित्यवैरी पापबुद्धिर्नृशंसकृत्।
सत्यां प्रतिज्ञामचिराद् द्रक्ष्यसे तां सुयोधन॥ १६॥
 
 
अनुवाद
सुयोधन! भीमसेन ने क्रोध में भरकर जो वचन तुम्हारे भाई दु:शासन से कहा है, वह तुम शीघ्र ही देखोगे, जो संकीर्ण बुद्धि वाला, पाप से अनभिज्ञ, सदा शत्रुवत रहने वाला, पापी और क्रूर है॥15-16॥
 
Suyodhana! You will soon see the promise of what Bhimasena, filled with anger, has spoken to your brother Dushasan, who is narrow-minded, ignorant of evil, always hostile, sinful and cruel.॥ 15-16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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