श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 163: पाँचों पाण्डवों, विराट, द्रुपद, शिखण्डी और धृष्टद्युम्नका संदेश लेकर उलूकका लौटना और उलूककी बात सुनकर दुर्योधनका सेनाको युद्धके लिये तैयार होनेका आदेश देना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  5.163.13 
सूर्योदये युक्तसेन: प्रतीक्ष्य
ध्वजी रथी रक्ष तं सत्यसंधम्।
अहं हि व: पश्यतां द्वीपमेनं
भीष्मं रथात् पातयिष्यामि बाणै:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
सूर्योदय के समय तुम अपनी सेना को ध्वजाओं और रथों से सुसज्जित करके सब ओर दृष्टि रखो और अपनी प्रतिज्ञा पर अडिग भीष्म की रक्षा करो। मैं तुम्हारे शरणागत भीष्म को अपने बाणों से मारकर तुम्हारे सैनिकों के सामने ही रथ से नीचे गिरा दूँगा।॥13॥
 
At sunrise, equip your army with flags and chariots and keep an eye on all sides and protect Bhishma who is faithful to his vows. I will kill Bhishma, who has become your refuge, with my arrows and throw him down from the chariot in front of your soldiers.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)