श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 162: पाण्डवपक्षकी ओरसे दुर्योधनको उसके संदेशका उत्तर  »  श्लोक 57
 
 
श्लोक  5.162.57 
श्रीकृष्ण उवाच
मद्वचश्चापि भूयस्ते वक्तव्य: स सुयोधन:।
श्व इदानीं प्रपद्येथा: पुरुषो भव दुर्मते॥ ५७॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् भगवान श्रीकृष्ण ने कहा - उलूक ! इसके बाद तुम दुर्योधन से यह भी कहना - 'दुर्मते ! अब कल ही युद्धभूमि में आकर अपना पुरुषत्व दिखाओ ॥57॥
 
After that Lord Shri Krishna said – Uluk! After this, you should also tell this to Duryodhana - 'Durmate! Now come to the battlefield tomorrow itself and show your manhood. 57॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)