श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 161: पाण्डवोंके शिविरमें पहुँचकर उलूकका भरी सभामें दुर्योधनका संदेश सुनाना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  5.161.9 
अमर्षं राज्यहरणं वनवासं च पाण्डव।
द्रौपद्याश्च परिक्लेशं संस्मरन् पुरुषो भव॥ ९॥
 
 
अनुवाद
हे पाण्डुपुत्र! अपने क्रोध, राज्य हरण, वनवास और द्रौपदी को दिए गए कष्टों को स्मरण करो और मनुष्य बनो॥9॥
 
Son of Pandu! Remember your anger, the abduction of the kingdom, the exile and the sufferings inflicted on Draupadi and become a man.॥ 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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