| श्री महाभारत » पर्व 5: उद्योग पर्व » अध्याय 161: पाण्डवोंके शिविरमें पहुँचकर उलूकका भरी सभामें दुर्योधनका संदेश सुनाना » श्लोक 39 |
|
| | | | श्लोक 5.161.39  | शारद्वतमहामीनं विविंशतिमहोरगम्।
बृहद्बलमहोद्वेलं सौमदत्तितिमिङ्गिलम्॥ ३९॥ | | | | | | अनुवाद | | हमारी सेनारूपी महान् समुद्र में कृपाचार्य महान् मछली के समान हैं, विविंशति उसके भीतर रहने वाला महान् सर्प है, बृहद्बल उसके भीतर उठने वाले महान् ज्वार के समान है, भूरिश्रवा तिमिंगिल नामक मछली के स्थान पर है ॥39॥ | | | | In the great ocean of our army, Kripacharya is like the great fish, Vivinshati is the great serpent living within it, Brihadbal is like the great tide rising within it, Bhurishrava is in the place of the fish named Timingil. 39॥ | | ✨ ai-generated | | |
|
|