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श्लोक 5.161.36  |
न माया हीन्द्रजालं वा कुहका वापि भीषणा।
आत्तशस्त्रस्य मे युद्धे वहन्ति प्रतिगर्जना:॥ ३६॥ |
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| अनुवाद |
| माया, जादू या भयंकर छल-कपट युद्धभूमि में शस्त्रधारी दुर्योधन के क्रोध और गर्जना को ही बढ़ाते हैं (मुझे भयभीत नहीं कर सकते)।॥36॥ |
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| Maya, magic or terrible deception only increase the anger and roar of Duryodhana who is armed in the battlefield (cannot frighten me).॥ 36॥ |
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