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श्लोक 5.161.33  |
सूदकर्मणि च श्रान्तं विराटस्य महानसे।
भीमसेनेन कौन्तेय यच्च तन्मम पौरुषम्॥ ३३॥ |
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| अनुवाद |
| हे कुन्तीपुत्र! राजा विराट के रसोईघर में रसोइया बनकर तुम्हारे भाई भीमसेन को जो कठोर परिश्रम करना पड़ा, वह सब मेरा ही परिश्रम है॥ 33॥ |
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| O son of Kunti! The hard work that your brother Bhimasena had to do by working as a cook in King Virat's kitchen is all my hard work.॥ 33॥ |
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