श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 161: पाण्डवोंके शिविरमें पहुँचकर उलूकका भरी सभामें दुर्योधनका संदेश सुनाना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  5.161.31 
सा वो दास्ये समापन्नान् मोक्षयामास पार्षती।
अमानुष्यं समापन्नान् दासकर्मण्यवस्थितान्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
तुम सब लोग अमानवीय अवस्था में थे और दासत्व की अवस्था में थे। उस समय द्रुपद की पुत्री कृष्णा ने ही तुम सबको दासत्व के संकट से बचाया था॥31॥
 
‘All of you were in an inhumane condition and were in the state of slavery. At that time it was Krishna, the daughter of Drupada, who rescued all of you from the danger of slavery.॥ 31॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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