श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 161: पाण्डवोंके शिविरमें पहुँचकर उलूकका भरी सभामें दुर्योधनका संदेश सुनाना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  5.161.27 
न तु पर्यायधर्मेण राज्यं प्राप्नोति मानुष:।
मनसैवानुकूलानि विधाता कुरुते वशे॥ २७॥
 
 
अनुवाद
‘कोई भी मनुष्य नाममात्र के धर्म से शासन प्राप्त नहीं करता; केवल भगवान ही हैं जो केवल मानसिक संकल्प से ही सबको अपने अधीन और अनुकूल बना लेते हैं।॥27॥
 
‘No human being attains rule by mere nominal Dharma; it is only the Creator who makes everyone subservient and favorable to Him by a mere mental resolution.॥ 27॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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