श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 161: पाण्डवोंके शिविरमें पहुँचकर उलूकका भरी सभामें दुर्योधनका संदेश सुनाना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  5.161.24 
अकत्थमानो युध्यस्व कत्थसेऽर्जुन किं बहु।
पर्यायात् सिद्धिरेतस्य नैतत् सिध्यति कत्थनात्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन! तू कथाएँ मत गढ़, युद्ध कर। तू अपनी इतनी प्रशंसा क्यों करता है? नाना प्रकार से युद्ध करने से ही राज्य की प्राप्ति होती है। अपनी झूठी प्रशंसा करने से तू इस कार्य में सफल नहीं हो सकेगा॥ 24॥
 
Arjuna! Do not make up stories but fight. Why do you praise yourself so much? Only by fighting in different ways can the kingdom be achieved. By praising yourself falsely, you will not succeed in this task.॥ 24॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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