श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 161: पाण्डवोंके शिविरमें पहुँचकर उलूकका भरी सभामें दुर्योधनका संदेश सुनाना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  5.161.2 
अभिज्ञो दूतवाक्यानां यथोक्तं ब्रुवतो मम।
दुर्योधनसमादेशं श्रुत्वा न क्रोद्‍धुमर्हसि॥ २॥
 
 
अनुवाद
राजन्! आप दूत के वचनों का अर्थ जानते हैं। मैं दुर्योधन द्वारा दिया गया संदेश शब्दशः दोहराऊँगा। उसे सुनकर आप मुझ पर क्रोधित न हों।'॥2॥
 
‘King! You know the meaning of the messenger's words. I will repeat the message given by Duryodhan verbatim. You should not get angry with me after hearing it.'॥ 2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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