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mahabharat 5.160.87: तुम्हारा स्थान और राज्य शत्रुओं के हाथ में पड़ गया है, उसे पुनः प्राप्त करो। युद्ध की इच्छा रखने वाले मनुष्य के यही दो उद्देश्य हैं; अतः उनकी सिद्धि के लिए प्रयत्न करो।' 87.   |   mahabharat अध्याय 5.160: दुर्योधनका उलूकको दूत बनाकर पाण्डवोंके पास भेजना और उनसे कहनेके लिये संदेश देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 160: दुर्योधनका उलूकको दूत बनाकर पाण्डवोंके पास भेजना और उनसे कहनेके लिये संदेश देना  »  श्लोक 87
 
 
श्लोक  5.160.87 
अमित्राणां वशे स्थानं राज्यं च पुनरुद्धर।
द्वावर्थौ युद्धकामस्य तस्मात् तत् कुरु पौरुषम्॥ ८७॥
 
 
अनुवाद
तुम्हारा स्थान और राज्य शत्रुओं के हाथ में पड़ गया है, उसे पुनः प्राप्त करो। युद्ध की इच्छा रखने वाले मनुष्य के यही दो उद्देश्य हैं; अतः उनकी सिद्धि के लिए प्रयत्न करो।' 87.
 
‘Your place and kingdom have fallen into the hands of the enemies, restore them. These are the only two purposes of a man who desires war; therefore, strive hard for their accomplishment. 87.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)