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राष्ट्रान्निर्वासनक्लेशं वनवासं च पाण्डव।
कृष्णायाश्च परिक्लेशं संस्मरन् पुरुषो भव॥ ८२॥
अनुवाद
हे पाण्डुपुत्र! राज्य से निर्वासित होने, वन में रहने और द्रौपदी के अपमान के दुःख को याद करके अब भी तो मनुष्य बनो।
O son of Pandu! Remembering the pains of being exiled from the kingdom, living in the forest and the insult of Draupadi, at least become a man even now. 82.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥