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mahabharat 5.160.80: ऐसा कहकर राजा दुर्योधन ठहाका मारकर हँस पड़ा। तत्पश्चात् वह पुनः उलूक से इस प्रकार बोला - 'उलूक! तुम पुनः वसुदेवनन्दन श्रीकृष्ण के समक्ष अर्जुन से ऐसा कहो-॥80॥   |   mahabharat अध्याय 5.160: दुर्योधनका उलूकको दूत बनाकर पाण्डवोंके पास भेजना और उनसे कहनेके लिये संदेश देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 160: दुर्योधनका उलूकको दूत बनाकर पाण्डवोंके पास भेजना और उनसे कहनेके लिये संदेश देना  »  श्लोक 80
 
 
श्लोक  5.160.80 
एवमुक्त्वा ततो राजा प्रहस्योलूकमब्रवीत्।
धनंजयं पुनर्ब्रूहि वासुदेवस्य शृण्वत:॥ ८०॥
 
 
अनुवाद
ऐसा कहकर राजा दुर्योधन ठहाका मारकर हँस पड़ा। तत्पश्चात् वह पुनः उलूक से इस प्रकार बोला - 'उलूक! तुम पुनः वसुदेवनन्दन श्रीकृष्ण के समक्ष अर्जुन से ऐसा कहो-॥80॥
 
Saying this, King Duryodhana burst out laughing. After that he again spoke to Uluk like this - 'Uluk! You again say this to Arjun in front of Vasudevanandan Shri Krishna -॥ 80॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)