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mahabharat 5.160.66-67h: कौरव सभा में तुमने जो प्रतिज्ञा की थी, वह झूठी नहीं होनी चाहिए। यदि तुममें शक्ति है, तो आकर दु:शासन का रक्त पी लो।'   |   mahabharat अध्याय 5.160: दुर्योधनका उलूकको दूत बनाकर पाण्डवोंके पास भेजना और उनसे कहनेके लिये संदेश देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.160.66-67h 
प्रतिज्ञातं सभामध्ये न तन्मिथ्या त्वया पुरा॥ ६६॥
दु:शासनस्य रुधिरं पीयतां यदि शक्यते।
 
 
अनुवाद
कौरव सभा में तुमने जो प्रतिज्ञा की थी, वह झूठी नहीं होनी चाहिए। यदि तुममें शक्ति है, तो आकर दु:शासन का रक्त पी लो।'
 
‘The vow you made earlier in the Kaurava Sabha should not be false. If you have the strength, come and drink the blood of Dushasan. 66 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)