Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 5.160.62-63h: श्री कृष्ण! मैं देख रहा हूँ कि आपका महान यश संसार में अचानक फैल गया है; किन्तु अब हमें ज्ञात हो गया है कि जो लोग आपकी पूजा करते हैं, वे वास्तव में पुरुषत्व के चिह्न धारण करने वाले नपुंसक हैं।   |   mahabharat अध्याय 5.160: दुर्योधनका उलूकको दूत बनाकर पाण्डवोंके पास भेजना और उनसे कहनेके लिये संदेश देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 160: दुर्योधनका उलूकको दूत बनाकर पाण्डवोंके पास भेजना और उनसे कहनेके लिये संदेश देना  »  श्लोक 62-63h
 
 
श्लोक  5.160.62-63h 
अकस्माच्चैव ते कृष्ण ख्यातं लोके महद् यश:॥ ६२॥
अद्येदानीं विजानीम: सन्ति षण्ढा: सशृङ्गका:।
 
 
अनुवाद
श्री कृष्ण! मैं देख रहा हूँ कि आपका महान यश संसार में अचानक फैल गया है; किन्तु अब हमें ज्ञात हो गया है कि जो लोग आपकी पूजा करते हैं, वे वास्तव में पुरुषत्व के चिह्न धारण करने वाले नपुंसक हैं।
 
Sri Krishna! I see that your great fame has suddenly spread in the world; but now we have come to know that those who worship you are actually eunuchs wearing the symbols of masculinity. 62 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)