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mahabharat 5.160.43: तुम्हारी बातें कुछ और हैं; परन्तु तुम्हारे कर्म कुछ और ही प्रतीत होते हैं। तुम्हारा वेद-अध्ययन और तुम्हारा शांत स्वभाव लोगों को दिखाने के लिए केवल दिखावा है।' 43.   |   mahabharat अध्याय 5.160: दुर्योधनका उलूकको दूत बनाकर पाण्डवोंके पास भेजना और उनसे कहनेके लिये संदेश देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 160: दुर्योधनका उलूकको दूत बनाकर पाण्डवोंके पास भेजना और उनसे कहनेके लिये संदेश देना  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  5.160.43 
अन्यथा किल ते वाक्यमन्यथा कर्म दृश्यते।
दम्भनार्थाय लोकस्य वेदाश्चोपशमश्च ते॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
तुम्हारी बातें कुछ और हैं; परन्तु तुम्हारे कर्म कुछ और ही प्रतीत होते हैं। तुम्हारा वेद-अध्ययन और तुम्हारा शांत स्वभाव लोगों को दिखाने के लिए केवल दिखावा है।' 43.
 
‘Your words are something else; but your actions appear to be something else. Your study of the Vedas and your calm nature are just a pretense to show to people. 43.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)