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mahabharat 5.160.40: ‘उसके अंग दिन-प्रतिदिन बलवान होते जा रहे हैं और हमारा समूह दिन-प्रतिदिन घटता जा रहा है। पिछले सात-आठ दिनों से मैंने दिण्डिक को देखा भी नहीं है।’॥40॥   |   mahabharat अध्याय 5.160: दुर्योधनका उलूकको दूत बनाकर पाण्डवोंके पास भेजना और उनसे कहनेके लिये संदेश देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 160: दुर्योधनका उलूकको दूत बनाकर पाण्डवोंके पास भेजना और उनसे कहनेके लिये संदेश देना  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  5.160.40 
अस्य गात्राणि वर्धन्ते गणश्च परिहीयते।
अद्य सप्ताष्टदिवसान् डिण्डिकोऽपि न दृश्यते॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
‘उसके अंग दिन-प्रतिदिन बलवान होते जा रहे हैं और हमारा समूह दिन-प्रतिदिन घटता जा रहा है। पिछले सात-आठ दिनों से मैंने दिण्डिक को देखा भी नहीं है।’॥40॥
 
‘His limbs are becoming stronger day by day and our group is decreasing day by day. For the last seven-eight days I have not even seen Dindik.’॥ 40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)