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mahabharat 5.160.36: फिर 'बहुत अच्छा, बहुत अच्छा' कहकर सबने दिण्डिक की भूरि-भूरि प्रशंसा की और उसके अर्थपूर्ण वचनों का यथायोग्य पालन किया। 36.   |   mahabharat अध्याय 5.160: दुर्योधनका उलूकको दूत बनाकर पाण्डवोंके पास भेजना और उनसे कहनेके लिये संदेश देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.160.36 
साधु साध्विति ते सर्वे पूजयांचक्रिरे तदा।
चक्रुश्चैव यथान्यायं डिण्डिकस्य वचोऽर्थवत्॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
फिर 'बहुत अच्छा, बहुत अच्छा' कहकर सबने दिण्डिक की भूरि-भूरि प्रशंसा की और उसके अर्थपूर्ण वचनों का यथायोग्य पालन किया। 36.
 
Then saying, 'Very good, very good' they all praised Dindik profusely and followed his meaningful words appropriately. 36.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)