Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.160.26-27: ‘प्रजानाथ! जब उन सब चूहों ने ऐसा कहा, तब उस बिल्ली ने, जो चूहों के लिए यमराज का रूप थी, उन सबको इस प्रकार उत्तर दिया - ‘मैं तप भी करूँगी और तुम्हारी रक्षा भी करूँगी - इन दोनों कार्यों में मैं कोई सम्बन्ध नहीं देखती - ये दोनों कार्य एक साथ नहीं हो सकते। तथापि, मुझे तुम सबके कल्याण की बात भी अवश्य करनी चाहिए॥ 26-27॥ | mahabharat अध्याय 5.160: दुर्योधनका उलूकको दूत बनाकर पाण्डवोंके पास भेजना और उनसे कहनेके लिये संदेश देना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
‘प्रजानाथ! जब उन सब चूहों ने ऐसा कहा, तब उस बिल्ली ने, जो चूहों के लिए यमराज का रूप थी, उन सबको इस प्रकार उत्तर दिया - ‘मैं तप भी करूँगी और तुम्हारी रक्षा भी करूँगी - इन दोनों कार्यों में मैं कोई सम्बन्ध नहीं देखती - ये दोनों कार्य एक साथ नहीं हो सकते। तथापि, मुझे तुम सबके कल्याण की बात भी अवश्य करनी चाहिए॥ 26-27॥
‘Prajanaath! When all those mice said this, that cat who was the form of Yamaraj for the mice replied to all of them in this manner – ‘I will do penance and also protect you – I do not see any connection between these two tasks – both these tasks cannot be done together. However, I must also talk about the welfare of all of you.॥ 26-27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥